आरव की कहानी|

शीतकाल का समय आ गया था और हरियाली से भरी हुई पहाड़ीयों में बर्फ बिछ गई थीं। एक छोटे से गाँव में एक छोटा सा बच्चा था जिसका नाम आरव था। आरव गर्मीयों की तुलना में सर्दियों को बहुत पसंद करता था।

गाँव में एक सुंदर झील थी, जिसमें सुबह-सुबह पक्षी गाने गाते थे और जल की धूप में खिली फूलों की खुशबू छाई रहती थी। आरव हमेशा उस झील के किनारे बैठकर अपने दोस्तों के साथ खेतों में खेती करने की बातें करता था।

एक दिन, गाँव में एक मेला लगा था जिसमें बहुत सारी रोचक चीजें दिखाई दे रही थीं। आरव ने अपने दोस्तों को साथ लेकर मेले की ओर रुख किया। मेले में उसने एक रंगीन गुब्बारे की दुकान देखी और उसमें खो गया।

वहां उसने देखा कि गुब्बारे के अंदर हर बूंद में एक छोटा सा विश्व है, जो रंगों से भरा हुआ है। आरव को वह दृश्य बहुत पसंद आया और उसने तुरंत एक गुब्बारा खरीद लिया।

गुब्बारे को उड़ाते हुए, आरव ने महसूस किया कि वह एक नए और रंगीन दुनिया में है। गुब्बारा ऊँची ऊँची ऊड़ान भरता रहा और आसमान में चमकते रंगों की छाया छोड़ रहा था।

आरव की आँखों में चमक आ गई और उसने समझा कि छोटे से गाँव का भी एक छोटा सा हिस्सा दुनिया में है, जिसमें उसकी भी अहम भूमिका है। वह मेले से वापस आकर अपने दोस्तों को गुब्बारे के साथ खेत में बैठकर अपने अनुभवों का आनंद लेने का प्रसन्नता जताया।

इसके बाद से, आरव ने समझा कि छोटी सी चीजें भी हमें बहुत खुशियाँ दे सकती हैं, हमें सिर्फ उन्हें देखने का नज़रिया बदलना पड़ता है। उसने गुब्बारे की छाया में एक नया दृष्टिकोण प्राप्त किया और अपनी छोटी सी दुनिया को और भी हरित, बहुमूल्य बना दिया।

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